Home Business news Vladimir Putin ko roak paana mushkil | पुतिन को रोक पाना मुश्किल

Vladimir Putin ko roak paana mushkil | पुतिन को रोक पाना मुश्किल

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क्रूड से लेकर गेंहू का बड़ा उत्पादक, फॉरेन रिजर्व में 5वें नंबर पर; जानें पाबंदी से निपटने को कितना तैयार रूस

यूक्रेन पर गुरुवार को हमला करने के बाद रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जंग खत्म होने की उम्मीदें भी खारिज कर दी हैं। लावरोव ने साफ कहा है कि अब यूक्रेन से बातचीत का ऑफर कबूल नहीं है। बातचीत सिर्फ एक शर्त पर हो सकती है कि यूक्रेन सरेंडर कर दे। उधर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रोकने के लिए पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं, जो नाकाफी नजर आ रहे हैं।

सबसे पहले रूस पर लगे प्रतिबंधों को जानिए
प्रतिबंधों को सबसे प्रभावी कूटनीति माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्लोबल ट्रेड के ज्यादातर ट्रांजैक्शंस यूएस डॉलर में होते हैं। अगर अमेरिका अपने फाइनेंशियल सिस्टम से प्रतिबंध वाले देश के बैंकों को ब्लैकलिस्ट कर देता है, तो इनसे ट्रांजैक्शन करना असंभव सा हो जाता है। प्रतिबंधों का मकसद किसी देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना ही होता है।

यूरोपीय संघ ने इस हफ्ते की शुरुआत में 27 लोगों और संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया था। ब्रिटेन ने गेन्नादी टिमशेंको समेत तीन बिजनेसमैन पर प्रतिबंध लगाया है। ये अरबपति बिजनेसमैन रूसी राष्ट्रपति के काफी करीब हैं। इनके अलावा रोसिया, आईएस बैंक, जेनबैंक, प्रोमसव्याजबैंक और ब्लैक सी बैंक पर भी प्रतिबंध लगाया है। वहीं, अमेरिका ने प्रोम्सव्याजबैंक और वीईबी बैंक पर प्रतिबंध लगाया है। रूस के सरकारी कर्ज पर भी पाबंदियां बढ़ाई गई हैं। उधर, जर्मनी ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन पर रोक लगाई है। इसे रूस से बाल्टिक सागर के जरिए सीधे गैस की सप्लाई करने के लिए बनाया गया है

क्या पश्चिमी देश प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाएंगे?


रूस पर अभी और जो प्रतिबंध लगाए गए हैं, वो काफी कम है। 2014 में जो प्रतिबंध क्रीमिया को यूक्रेन से अलग करने पर लगे थे, यह उनसे भी कम हैं। ऐसे में अब जिन प्रतिबंधों को लगाने पर विचार किया जा रहा है उनमें से एक है स्विफ्ट सिस्टम। SWIFT यानी सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन। स्विफ्ट एक ग्लोबल मैसेजिंग सर्विस है।

200 देशों में हजारों फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन इसका इस्तेमाल करते हैं। अगर रूस को स्विफ्ट नेटवर्क से डिसकनेक्ट किया जाता है तो रूसी बैंकों के लिए विदेश में कारोबार करना काफी मुश्किल हो जाएगा, लेकिन इन प्रतिबंधों का असर दूसरे देशों पर भी होगा। SWIFT प्रतिबंध का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ भी किया गया था। इसकी वजह से उसने तेल की बिक्री से होने वाली कमाई खो दी थी।

क्या रूस प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए तैयार है?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने करीब एक महीने पहले चेतावनी दी थी कि अगर रूस, यूक्रेन पर हमला करता है तो वो डॉलर्स में कारोबार नहीं कर पाएगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, रूसी संस्थाएं प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा अच्छे से तैयार हैं। रूस ने 2014 से ही अमेरिकी ट्रेजरी और डॉलर से दूरी बना ली है। रूस ने फॉरेन रिजर्व में डॉलर से ज्यादा सोने और यूरो को शामिल किया है। 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद लगे प्रतिबंधों से सबक लेकर रूस ने विदेशी निवेशकों पर अपनी निर्भरता को भी कम कर लिया है।

रूस का विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज कितना है?
रूस के पास तकरीबन 635 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो उसे दुनिया में 5वें नंबर पर खड़ा करता है। रूस का रिजर्व 2015 से 70% से भी ज्यादा बढ़ा है। ये लगभग रूस के डेढ़ साल के एक्सपोर्ट रेवेन्यूज के बराबर है। इसमें 16.4% हिस्सा डॉलर का है, 30% से ज्यादा जमा पूंजी यूरो और 22% गोल्ड है। विदेशी भंडार में 13% रेनमिन्बी भी है।

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