Home Politics News Sonia, Rahul ke liye 8 saal me pahli baar Congress hue eksaath, ab aage kya hoga Planning | सोनिया, राहुल के लिए 8 साल में पहली बार कांग्रेसी हुए एकजुट, अब आगे क्या होगी रणनीति

Sonia, Rahul ke liye 8 saal me pahli baar Congress hue eksaath, ab aage kya hoga Planning | सोनिया, राहुल के लिए 8 साल में पहली बार कांग्रेसी हुए एकजुट, अब आगे क्या होगी रणनीति

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नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी से ED की ओर से घंटों पूछताछ की जा चुकी है। इसके काउंटर में कांग्रेस केंद्र सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।

शुक्रवार को दिल्ली में महंगाई के विरोध में निकाले प्रोटेस्ट मार्च के बाद हर राज्य में इस तरह के प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि जनता के बीच में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया जा सके।

कांग्रेस इसी महीने 9 से 15 अगस्त के बीच पद यात्रा निकालने जा रही है। हर जिले में कांग्रेसी 75 किलोमीटर की पैदल यात्रा निकालेंगे। डेढ़ महीने बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से 2 अक्टूबर से भारत जोड़ो पद यात्रा देश भर में निकाली जाएगी। इसके जरिए भी महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश होगी।

2024 तक कांग्रेस की ओर से लगातार एक के बाद एक प्रोग्राम तय किए जाएंगे, जिससे सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में आसानी हो सके। इसके लिए राजस्थान के CM अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के CM भूपेश बघेल सहित देशभर के बड़े कांग्रेसी नेताओं को मैदान में उतारा जा रहा है।

पहली बार 8 साल सत्ता से बाहर कांग्रेस, सड़कों पर संघर्ष

देश की आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस आठ साल से अधिक समय से सत्ता से बाहर है। कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष के तौर पर भी अपनी पहचान नहीं बना पाई है। एक के बाद एक राज्य कांग्रेस हारते जा रही है। वो केवल राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक सिमट गई है। जबकि झारखंड और तमिलनाडु में गठबंधन सरकार में शामिल है। तमाम युवा और जनाधार वाले नेता पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं, जिसके चलते कांग्रेस मुश्किल दौर से गुजर रही है।

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी पर नेशनल हेराल्ड मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। जिसकी जांच ED कर रही है। इससे देश में सियासी माहौल गरमाया हुआ है। राहुल और सोनिया का बचाव करने के लिए पहली बार कांग्रेस के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक सड़कों पर उतरे। कांग्रेस दिग्गजों ने दिल्ली में डेरा डाले रखा। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस नेता देशभर में सड़कों पर नजर आए।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, लोकसभा में विपक्षी दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सड़क पर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, लोकसभा में विपक्षी दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सड़क पर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सोनिया-राहुल के लिए एकजुट हुए कांग्रेसी

हर राज्य में कांग्रेस के बीच खेमाबंदी है। शायद ही ऐसा कोई राज्य है, जहां पर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी न हो, लेकिन सोनिया- राहुल गांधी के नाम पर एक दूसरे के विरोधी नेता गुटबाजी भूलकर एक मंच पर आ रहे हैं, जिससे सियासी संदेश गलत न जाए।

राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। इसी तरह हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित सभी राज्यों में कांग्रेसी सोनिया-राहुल के लिए आपसी विरोध भूलकर एक दूसरे का साथ दे रहे हैं।

कांग्रेस के नेताओं ने काले कपड़े पहनकर किया विरोध

शुक्रवार को महंगाई के विरोध में कार्यकर्ता से लेकर नेता तक काले कपड़े में नजर आए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित तमाम कांग्रेस के नेता काले कपड़े में नजर आए। प्रियंका गांधी तो काले कपड़े में सड़कों के बीच में बैठ गई थीं।

सत्ता के लिए सड़कों पर संघर्ष

चार महीने बाद गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव होंगे। उसके बाद 2023 में कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी पर हाथ डालने के बाद कांग्रेस के सामने अब संघर्ष करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

स्वभाविक तौर पर फिलहाल पब्लिक कांग्रेस के साथ जुड़ने वाली नहीं है, जिसके कारण कांग्रेस की ओर से जनता में जाकर इमोशनल कार्ड खेलने की तैयारी है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से लंबे संघर्ष करने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे जमीनी स्तर पर कांग्रेस को खाद-पानी मिल सके।

‘कांग्रेस ED के एक्शन पर इमोशनल लाभ उठाएगी’

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई कहते हैं, ‘देश की राजनीतिक संस्कृति है कि यदि किसी राजनेता पर आरोप सिद्व हो जाए, तो वह किनारे लग जाता है। जैसे लालू यादव, ओम प्रकाश चौटाला, मधु कोड़ा, सुखराम। कुछ नेताओं पर आरोप तो लगे, लेकिन साबित नहीं हुए। ऐसे में उन्हें सियासी तौर पर नई ऊर्जा मिली। उनकी सत्ता में वापसी हुई। उदाहरण के लिए इंदिरा गांधी, शिबू सोरेन, करुणानिधि और जयललिता।

मोदी सरकार ने राहुल और सोनिया गांधी पर हाथ डाला है, तो उसे लॉजिकल एंड पर ले जाना पड़ेगा। ऐसा न होने पर सरकार की किरकिरी होगी। यह भी तय है कि कांग्रेस ED के एक्शन को देशभर में घूम-घूम कर इमोशनल तौर पर उसका लाभ उठाएगी। साथ ही देश में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगी, जिससे कांग्रेस जनता में केंद्र के खिलाफ अपनी बात को ठीक तरीके से रख सके।’

‘कानून का हाथ गांधी परिवार तक पहुंच चुका है’

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, ‘गांधी परिवार शुरू से ही खुद को कानून से ऊपर समझता रहा। इसी के चलते नेशनल हेराल्ड मामले में गलती कर बैठा, लेकिन कानून के हाथ तो लंबे होते हैं। कानून का हाथ गांधी परिवार तक पहुंच चुका है। यदि मामला इनकम टैक्स का होता तो एक बार के लिए कोई व्यक्ति बच भी सकता था, लेकिन यह मामला ED का है। क्रिमिनल ऑफेंस का है, जिसमें गांधी परिवार जेल भी जा सकता है।

जेल जाने के बाद से भ्रष्टाचार के मामले में जनता की सहानुभूति नहीं मिलती। भ्रष्टाचार का आरोप साबित होने पर लालू यादव, ओम प्रकाश चौटाला, सुखराम और मधु कोडा जैसे कई उदाहरण देश में मौजूद हैं, जिनका सियासी सफर खत्म हो गया। महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना तो कांग्रेस का केवल एक बहाना है। पिछले आठ साल में क्यों नहीं कांग्रेस ने विपक्ष के तौर पर ऐसा कोई धरना प्रदर्शन किया, जो अब कर रही है।‘

और पढ़े https://www.starnewshindi.com/2022/08/vice-president-election-2022-aaj-hoga.html

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