Home Daily News Russia-Ukraine war ke 100 days: Jaaniye India par war ka effect | रूस-यूक्रेन युद्ध के 100 दिन: जानिए भारत पर युद्ध का असर

Russia-Ukraine war ke 100 days: Jaaniye India par war ka effect | रूस-यूक्रेन युद्ध के 100 दिन: जानिए भारत पर युद्ध का असर

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68 लाख लोगों से छिन गया घर, हर पल एक बच्चा शरणार्थी बन रहा; 

आज से 100 दिन पहले 24 फरवरी को NATO मेंबरशिप को लेकर रूस-यूक्रेन में तनाव इस कदर भड़का कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने जंग का आगाज कर दिया। तब से इन बीते 100 दिनों में यूक्रेन की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कभी चमक धमक और रोशनी से पटे रहने वाले यूक्रेनी शहर आज खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।

युद्ध की इस तपिश ने पूर्वी यूरोप के बाहर दुनिया के दूसरे देशों को भी कई परेशानी में डाला है, इनमें भारत भी शुमार है। आज हम आपको बताते हैं कि बीते 100 दिनों में किस तरह इस युद्ध वजह की वजह रूस-यूक्रेन के साथ भारत को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने भारत से निकाल लिए 1 लाख करोड़ रुपए
सबसे पहले भारत की बात करें तो जंग शुरू होने के बाद तीन महीने के भीतर ही फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने इंडियन मार्केट से 1 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए, जबकि इससे पहले पिछले 9 महीने में कुल 50 हजार करोड़ रुपए ही निकाले गए थे। भारत सहित दुनिया भर के सभी उभरते हुए बाजारों को महंगाई की वजह से मौद्रिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

इस युद्ध की वजह से रुपए को भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट का सामना करना पड़ा। IMF के मुताबिक, जहां 23 फरवरी को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 74.6 पर था, वहीं 31 मई को ये 77.7 के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। दूसरी तरफ 2022 की शुरुआत में जहां क्रूड ऑयल की कीमत 80 डॉलर बैरल थी वो रूसी हमले के बाद 128 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई महंगाई दर
भारत में सालाना महंगाई दर अप्रैल 2022 में बढ़कर 7.8% हो गई, जो मई 2014 के बाद सबसे ज्यादा है। खाद्य महंगाई दर लगातार सातवें महीने बढ़कर 8.4% हो गई। 31 मई को वनस्पति तेल की कीमत पिछले साल के मुकाबले 26.6% बढ़ गई, जबकि गेहूं की कीमत में 14.3% उछाल आया। इसके अलावा दुनिया भर के 45 देश गंभीर खाद्य संकट के मुहाने पर पहुंच चुके हैं।

68 लाख यूक्रेनी नागरिकों छोड़ना पर देश


रूसी हमले की वजह से यूक्रेन के 68 लाख लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है, जो उसकी आबादी का लगभग 15% है। यानी, हर 6 में से एक यूक्रेनी को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। UNHRC की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 68 लाख लोगों में से लगभग 36 लाख लोग पोलैंड पहुंचे हैं, जिसकी वजह से उसकी जनसंख्या में 10% का उछाल आ गया।

2021 में जहां यूक्रेन की आबादी 4.3 करोड़ थी, वो अब घटकर 3.7 करोड़ रह गई है। दूसरी तरफ 80 लाख लोग यूक्रेन में आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, जिस वजह से एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया। यह संकट इतना विकराल है कि यूक्रेन में हर गुजरते सेकेंड के साथ एक बच्चा युद्ध शरणार्थी बन रहा है।

रूस पर अब तक 10 हजार से ज्यादा प्रतिबंध लगे
रूस की घेराबंदी करने के लिए पश्चिमी देश लगातार उस पर प्रतिबंधों का शिकंजा कस रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से रूस पर 5,831 प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 1,144 प्रतिबंध अमेरिका ने लगाए हैं। इसके अलावा 4,800 से ज्यादा रूसी नागरिकों पर बैन लगाया गया है और 562 इंस्टीट्यूशन और 458 कंपनियों को प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है। कुल मिलाकर, 2014 से अब तक रूस पर 10,159 प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

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